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*🥀 उर्से ताजुश्शरीअह, رحمت الله عليه 🥀*
*पोस्ट नं. ➪ 1️⃣7️⃣*
*👑हुज़ूर ताजुश्शरीआ की जिन्दगी मुबारका*
*🏫हुसूले उलूम इस्लामिया*
💎शैख़ साहिब दारुल उलूम मन्जरे में दर्स व तदरीस दिया करते थे। उनके खाश तलामिजा में आप का शुमार होता था आप दौराने ताल्ब इल्मी मामूल था कि अलस्सुबह अरबी अख़बारात उसताद को सुनाते और उर्दू हिन्दी के अखबारात की ख़बरों व इत्तिलाआत को अरबी, जबान में तर्जमा कर के सुनाते आप को शैख साहिब बड़ी तवज्जोह और इन्हेमाक से पढ़ाते आप की जिहानत व फतानत को देखते हुये जामिआने अजहर में दाखिला का मशवरा मौलाना इब्रहीम रजा खाँ जीललानी को दिया तो वह तैयार हो गये। ताजुश्शरीआ जानशीन मुफ़्ती ए आज़म 1963 ई. में जामिया अजहर काहिरा मिस्र तशरीफ ले गये। वहाँ आप ने कुल्लिया उसुलुद्दीन" (एम-ए--में दाखला लिया मुसलसल तीन साल तक जामिया अजहर मिस्र में फन तफसीर व हृदीस के माहिर असातिजा से इक्तिसाव इल्म किया
❣️ताजुश्शरीआ बचपन ही से जहानत व फितानत और कुव्यतं हाफिजा के मालिक थे और अरबी अदब के दिलदादा थे जामिया अजहर मिस्र में दाखिला के बाद जब आप की जामिया के असातिजा और तलबा से गुफ्तगु हुई तो वह आप की ये तकल्लुफ फसीह व चलीग अरबी गुफ्तगु: मन कर महवे हैरत हो जाते थे और कहते थे कि *!एक जामियुनन्सल हिन्दुतानी अरबियुनन्सल अहले इल्म हज़रात से गुफ्तगू करने में कोई ताल्लुक महसूस नहीं करता*
*(📚हयात ए ताजुश्शरीआ सफ़ह,32,33)*
*📬 पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍️*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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