7वाॅ उर्स ए हुज़ूर ताजुश्शरिया अलैहिर्रहमा
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*🥀 7वाॅ उर्स ए हुज़ूर ताजुश्शरिया अलैहिर्रहमा मुबारक हो 🥀*
✏️ उर्से ताजुश्शरिया अलैहिर्रहमा में आने वाले ज़ायरीन और बिलखुसूस हज़रत के मुरीदीन ये तहिया करें कि अपने मुर्शिद के हाथ में हाथ देते वक़्त जो वादे किए थे उन वादों पर अमल करना शुरू करें *हदीस ए पाक में है कि वादा खिलाफी करने वाला मुनाफ़िक़ है* ( मफ़हूम )
ये एक आम मुसलमान से किये गए आम वादे के ताल्लुक से है तो सोचिए कि मुर्शिद से बैत होते वक़्त अल्लाह ओ रसूल की रज़ा मक़सूद होती है और वादे भी उसी मुताबिक़ किये जाते हैं ,
*फिर इस पर कितना सख्त हुक्म होगा*
फिर क्यूँ इस वादे के खिलाफ करने में शर्म महसूस नहीं होती
याद रखिये फ़क़त नाम लेने से फ़ैज़ ए मुर्शिद हासिल नहीं हो सकता
जिस मक़सद के लिए मुर्शिद ने बैत किया वो मक़सद पूरा होगा तब ही शेख की रूह भी खुश होगी और नज़रे करम भी होगी ,
बाज़ हज़रात को कुछ कड़वा लगेगा मगर ये हक़ीक़त है कि असर ए हाज़िर में हज़रत के मुरीदीन की तादाद सबसे ज़्यादा है करोड़ों में है
अगर आपके मुरीदीन खुद ही आमिल हो जाएं अपने शेख से किये गए वादों पर तो न किसी को उंगली उठाने का मौका मिलेगा न कोई तंज़ीम या गिरोह आप पर तंज कस पायेगा पहले खुद आमिल बनो अगर अपनी ही इस्लाह कर लो तो करोड़ों की तादाद वैसे ही राह ए रास्त पर आ जायेगी ,
*शेख से किये गए वादे*
फ़राइज़ ओ वाजिबात को उनके वक़्तों पर अदा करता रहूँगा ,
मज़हब ए अहले सुन्नत पर सख्ती से क़ायम रहूँगा ,
गीबत , चुगली , झूट , ज़िना , हर कबीरा ओ सगिरा से बचता रहूँगा ,
बदमज़हब की सोहबत से बचता रहूँगा ,
*मैंने अपना हाथ गौसे पाक के हाथ मे दिया ,*
इन वादों को पाए तकमील तक पहुंचाना ही असल मक़सद ए बैत है न कि अपना नाम करना कि मैं उससे मुरीद हूँ मेरा शेख ये है वो है
*एक बात और ज़हन नशीं कर लें कि आज बहुत से हज़रात परेशान हाल हैं अपने आस पास देखिए जहां भी नज़र में आएं उनकी मदद करिए बहुत से गैरतमंद ज़बान से नहीं कह या रहे मगर उनके यहाँ चूल्हा जलना भी मुश्किल हो रहा है इस मुबारक मौके पर उनकी मदद करके इसका सवाब अपने मुर्शिद की रूह को इसाल कीजिये ये है असल मुहब्बत यही असल मक़ासिद हैं बैत के सिर्फ नारों से अब काम नहीं चलने वाला नारों से ज़्यादा काम कीजिये नाम खुद ही जायेगा आपके मुर्शिद ने नारे नहीं लगवाए बल्कि पूरी दुनिया मे बड़ी खामोशी से काम करके गए हैं हमने खुद देखा है हज़रत अपने नाम के नारे लगाने से रोक देते थे उसका सिला अल्लाह करीम ने उन्हें दिया जो आपके सामने है ,*
*✍️ अमल से ज़िन्दगी बनती है जन्नत भी जहन्नम भी ,*
*ये ख़ाकी अपनी फितरत में न नूरी है न नारी है ,*
*📚 मलफूज़ाते फ़ैज़ बरेलवी*
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*🏁 मसलके आला हज़रत 🔴*
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