आह हुज़ूर "ताजुश्शरीअह रहमतुल्लाह अलैह" यौमे विसाल
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*🥀 आह हुज़ूर "ताजुश्शरीअह रहमतुल्लाह अलैह" यौमे विसाल 🥀*
*💔 आज 20 जुलाई अंग्रेजी तारीख के हिसाब से 7:14 के वक़्त अज़ान ऐ मगरिब में उधर मोअज़्ज़िन ने अज़ान दी इधर अल्लाह का एक मुकद्दस अज़ीज़ बंदा अज़ान का जवाब दिया और लबों पर अल्लाहु अकबर की सदा लगाके दुनिया ए फानी को छोड़ कर अपने हकीकी मालिक से जा मिलें !*
*तमाम निज़ाम दुनिया का चल रहा था ! सब अपने अपने दुनियावी काम में मुब्तिला थें ! अचानक एक ऐसा लम्हा आया की अहले सुन्नत के दिल की धड़कन हम सबके अच्छे सच्चे प्यारे पीरो मुर्शिद सय्यदी अक़ाई मौलाई हुज़ूर ताजुश्शरीअह के दिल का धड़कन रुक गया 💔 ,,,,*
और ये बात जैसे जंगल में आग की तरह फैलती ,
*वैसे फैलने लगी हत्ता की लोगों को यकीन तक न हो रहा अज़हरी मिया नहि रहें, तहक़ीक़ तस्दीक का ये आलम था की लोग मानने को तैयार नहीं थें !*
आह मुर्शिद आपके साँसों पे तहक़ीक़े चलीं ये बलन्दी का आलम था !
*हिन्द बर्रे सगीर , पकिस्तान , मिश्र , सऊदी , बर्तानिया , यूरोप में कई कंट्रीस , तुर्की जॉर्डन मुल्के शाम , बग्दाद् , इराक , मदीना पाक , बंगलादेश , अफ्रीका ,*
जहाँ जहाँ आपने कदम रखा मसलके आला हज़रत का डंका बजाया ये तो ऊपर कुछ मुख़्तसर नाम है कंट्रीस के सब जगह आपके मुरीदीन वा अक़ीदत रखने वाले आपसे , सारों के दिल बेचैन आँखों में आसू सब तरफ बस एक ही नाम एक ही सदा ज़ारी था अख्तर रज़ा नहीं रहें ज़मीनी ज़रिये से या सोशल साइट्स से सब तरफ यही खबर फैली थी !
*हिंद के गोशे गोशे खित्ते खित्ते क़ूचे क़ूचे से बस्ती से करिया से डगर डगर से हर ज़िले से कस्बे से गांव से देहात से लोग इस खबर को सच पाके शहर ए बरैली के तरफ कूच करने लगें , उधर बरैली शरीफ के लोगों का हुजूम लाखों का लग चूका था !*
दुनिया भर से ताज़ियत नामा आने लगा ओलमा तो ओलमा इस्लामिक मुल्क के प्रेसीडेंट ने भी ताज़ियत नामा भेजा जिसमे एक मशहूर नाम रजब तय्यब एर्डोगान का भी है बड़ी बड़ी इस्लामिक यूनिवर्सिटीज जिसमे एक जाम ए अज़हर भी जहाँ से आपने फरागत हासिल करके दुनिया भर में उसको एक पहचान दे दी !
*शहर ए बरैली में लोगों का हुजूम लगने लगा अरफ़ा के मैदान मालूम पड़ने लगा बड़े बड़े ओलमा शहर ए बरैली की तरफ कूच करने लगें जो जहाँ जिस हालत में था सब बरैली के तरफ रुख करने लगें अपने तो अपने हमने तो गैर मुस्लिम भी गम में डूबे थें आँखों में अश्क ज़ारी थें !*
ऐसी मूसलाधार बारिश की लोगों के कमर तक पानी भरा पर *ताजेशरीअत की इक झलक के लिए लाइन लगाय सुबह से शाम तक ख़डे थें बारिश में ,*
अल्लाह की तरफ से निशां देहि भी हो गई रहमत की बारिश अपने प्यारे बंदे के लिए आसमान से गिरा के बादल को रुला कर आपके मकबूलियत हक़्क़ानियत का डंका बजा दिया !
*आपका ज़नाज़ा पाक जब उठाया गया सौदागरान की गलियों से किसी को खबर ना थी ऐसी भीड़ हो जायगी की बरैली के हाईवे पे 10 12 किलोमीटर तक जाम लग जायगा प्रशासन डर जायगी कहीं ओवर ब्रीज़ ना टूट जाय !*
आपके जनाज़ा जैसे सौदागरान से निकला पीछे आपके आशिक आपके फिदाई आपके मुरीदीन उसमे ये फ़कीर भी आपके ज़नाज़े के दो हाथ फासले पे था आँखों से आसु ऐसे थें जैसे सर से साया हट गया ! 💔
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*जैसे जैसे रोड पे आपका ज़नाज़ा पंहुचा ऐसा मालूम पड़ा की अल्लाह ने फरिश्तों को इंसानी शक्ल में उतार दिया मेने अपनी ज़ाहिरी जिंदगी में कभी ऐसी भीड़ ऐसा तादात कभी ना देखा किसी नेता के लिए किसी एक्टर के लिए किसी भी दुनिया वालो के लिए , जो भीड़ अंजुम मेरे पीरो मुर्शिद के जनाज़े में था !*
पूरी दुनिया ऐ सुन्नियत हैरान थी !
*वहाबी , देओबंदी , तमाम बदमज़हब हैरान थे सबने आपके हक़्क़ानियत का लोहा माना !*
आज भी अक़्ले इंसान हैरान है !
पीने के पानी का किल्लत पड़ गया बोतले तक खत्म हो गई बरैली में ! पर मेरे पीरो मुर्शिद का फैज़ ज़ारी था उसमे कोई कमी नहि थी दीवानो का गला खुश्क लब सूखें थें पर क्या मज़ाल प्यास की जो लबों से ताजेशरीअत के नारे को बलंद करने से रोक ले , पूरे शहर ऐ बरैली में बस एक नारा गूँज रहा था इंसान फ़रिश्तें चरिन्द परिन्द जिन जिन्नात सब मिलके लगा रहे थें,
*बस्ती बस्ती करिया करिया*
*ताजुश्शरीअह ताजुश्शरीअह*
ऐसा मालूम पड़ रहा था चरिन्द परिन्द भी बस अख्तर रज़ा के गीत गाय जा रहे थें ! इस्लामिया ग्राउंड में पहले से लाखों की तदात में लोग पहुँचे थें लाखों लोग का हुजूम आपके जनाज़े के पीछे लाखों लोगों का हुजूम गली कूचे ब्रीज़ पे छतों पे ना जाने कितने लाख लोग दो दिन के फासले में ज़ियारत करके चले गए थें !
*आपके वफ़ात से लेके आपके ज़नाज़े तक ना जाने कितनी करामाते जाहिर हुई आपके वफ़ात के बाद आपका आँखे खोलना आपका मुश्कुराना करोड़ो लाखों के मज़मे में आपके एक भी चाहने वालों को एक खरोच ना आना करोड़ों लोगों में नमाज़े ज़नाज़ा बिना माइक पे होना ना जाने कितनो को शिफा मिल गई कितनो की मुरादें पूरी हो गई ,,*
आपके ज़नाज़े के बरकत से आपकी नमाज़े ज़नाज़ा ज़ोहर बाद दोपहर के वक़्त हुई और लोगों में मिटटी दो दिन तक दी है !
ज़नाज़े के बाद करोडों के हुजूम से सारे बरैली के आने जाने के रास्ते बंद प्रसाशन हार मान चुकी थी पर क़ुर्बान जाऊं में आशिकाने ताजुश्शरीअह पे सबने अपने पीरो मुर्शिद की तरह डिसिप्लीन इस्लाम ने जो हमें दी वहि दिखाई और लोगों को लिए परेशानी ना बने बल्कि आसानी देते गए !
*आज 7 साल हो गया आपको गए इस दुनिया से पर अल्लाह ने ऐसी इज़्ज़त बक्शी की इलाका कोई हो जलसा कोई हो मजलिश कोई हो दीनी काम कोई हो अल्लाह अपने इस प्यारे तक़वा तहारत वाले बन्दे का नाम लोगों जबां से बार हा निकलवाता है !*
आपने अहले सुन्नत को एक जान बख्शी हर तरफ से आप सुन्नियों के ईमान को बचाते रहे सुलेहकुल्लियत मिनहाज़ियत राफ़ज़ियत तफजिलियत विचारधारा जैसे वक़्त के बड़े फ़ितने को अपनी विलायत की नज़रों से उसे माज़ूर कर दिया ,
और दिन रात दींन की खिदमत की नामूसे मुस्तफा नामूसे अहले बैत नामूसे सहाबा नामूसे औलिया अल्लाह पे पहरा दिया अल्लाह पाक हसनैन करीमैन के तवस्सुल से आपके दरजात बलन्द फर्माय
*और जाते जाते पैगाम सुना के हम सुन्नियों को अकेला छोड़ गए 😓 👇*
सुलहकुल्ली नबी का नहि सुन्नियों
सुन्नी मुस्लिम है सच्चा नबी के लिए !
*मसलके आला हज़रत सलामत रहे*
*एक पहचान दींन ऐ नबी के लिए !*
मसलके आला हज़रत पे कायम रहो
जिंदगी दी गई है इसी के लिए
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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