प्रोफेसर की टाई उतार दी*

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*🥀 करामते हुज़ूर ताजुश्शरियाह अलैहिर्रहमा 🥀*



🔛 *प्रोफेसर की टाई उतार दी*
जो अल्लाह व रसूल से डरता है उससे अल्लाह की मख़लूक़ डरती है मौलाना तौहीद अशरफ़ी साकिन शहज़ादपुर ज़िला अंबेडकर नगर का बयान है कि हुज़ूर ताजुश्शरिअह का सफ़र हॉलैंड का हुआ, जलसा में बहुत से डॉक्टर्स और प्रोफेसर्स टाई लगाकर शरीक थे आपने टाई की हक़ीक़त और टाई के ताल्लुक़ से ईसाइयों के अक़ीदे पर भरपूर तक़रीर फ़रमाई और टाई के जितने अक़्साम हैं उनकी भी वज़ाहथ फ़रमाई, इस ताल्लुक़ से जलसा के बाद आप से इस्तिफ़ा हुआ आपने दलाइल व बराहीन के साथ तश़्फ़ी बख़्स जवाब हॉलैंड रवाना फ़रमाया इस सिलसिला में आपकी किताब मुसम्मा, *टाई का मसअला* वुजूद में आई,

हुज़ूर ताजुश्शरिअह ने यह हरगिज़ नहीं सोचा कि यूरोप के दुनियावी मनसब पर फ़ाइज़ आला तालीम याफ़्ता हज़रात जलसा में मौजूद हैं, अगर टाई के ताल्लुक़ से गुफ़्तगू हुई तो कहीं यह सब नाराज़ ना हो जाएं, आपने हुक्मे शरा बयान फ़रमाकर अपने आलिमाना फ़क़ीहाना वक़ार को मजरूह होने से बचा लिया,

आजकल पीरो मुर्शिद को देखा जाता है कि पीरे तरीक़त की मसनद पर बैठने के बाद अहकामे शरीअत को नज़र अंदाज़ करना उनका शेवाह बन गया है, उनको सिर्फ़ फ़िक्र रहती है तो आमदनी की, नमाज़ रोज़ा अज़कार व वज़ाइफ़ और तज़किया ए नफ़्स व तस्फ़िया ए क़ुलूब की कोई फ़िक्र नहीं होती है,

औरतों का उठना बैठना ग़ैर शरई उमूर देखना, और तम्बीह ना करना और उसे हिक्मते अमली का नाम देना, ऐसे पीरों की फ़ितरत सानिया बन गई है, मगर हुज़ूर ताजुश्शरिअह एक साहिबे इल्मो फ़न के साथ बहर तरीक़त के ग़वास भी हैं, मुशाहिदीन (देखने वालों) में से किसी पर यह अम्र (काम) मुक़्फ़ी (छुपा) नहीं है कि हुज़ूर ताजुश्शरिअह के सामने कोई ग़ैर शरई अम्र वाक़्ए हो जाए और अपने खामोशी इख़्तियार की हो बल्के फ़ौरन हक्मे शरा बयान फ़रमाए हैं, आप की शख़्शियत जहां नूर अला नूर है,
वहीं पाकीज़ा अमल व किरदार के ताजदार भी हैं, आपका जाहिर व बातिन यकसा है यही सबब है की हुक्मे शरा बयान करते वक़्त किसी की परवाह नहीं करते हैं, आज तक हाज़िरीन में से किसी ने आपके पास औरतों को बैठते हुए नहीं देखा, औरतों के हाथ पर हाथ रखकर मुरीद करते हुए नहीं देखा, चैन वाली घड़ी पहनकर किसी आलिम या ग़ैरे आलिम को बैठे नहीं देखा, यह हक़ीक़त है कि जो अल्लाह (अज़्ज़ा व जल्ल) और रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम से डरता है उससे खुदा की मख़लूक़ डरती है, आपका तसल्लुब फ़िद्दीन किसी से पोशीदा नहीं है, ऐसा मुर्शिदे तरीक़त किसी को मिल जाए तो वाक़ई उसकी आख़िरत संवर जाए गी,

*📚 करामते ताजुश्शरिअह सफ़ह 12, 13*



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